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माँ - देखें तो एक शब्द हैं, और जो समझें तो हम निशब्द हैं......

माँ...देखें तो एक शब्द हैं, और जो समझें तो हम निशब्द हैं
Means We have no word to define the greatness of Mother.


Again these are my own words (poem) & I want to dedicate to my mother for making me whatever I am.Whatever I am and Whatever I will be, its just because of my mother.
No more words to define how much my mother matters in my life - 


My Mother is My World... 


तेरे आँचल में शीतलता,
तेरी बाहों में गर्मी माँ,

जब तू पास होती है,
मेरी दुनिया महकती माँ,

मेरे हंसने पर हंसती तू,
मेरे रोने पर रोती माँ,

मैं जब-जब लडखडाया हूँ,
तेरी अंगुली को थामा माँ,

डर से कांपा उठा जब मन,
तू गोदी में सुलाती माँ,

वो मेरा माँ जरा कहना,
और तेरा दौड़कर आना,

भूलकर सारी दुनिया को,
मेरी दुनिया सजाती माँ.....



                             - By Bharat Singh 

Wo Haseen Dard Ka Saudagar......

M BACK....


Today Its my own poem.I am not a poet and i dont know how to play with words.
I just pen down my feelings on paper and now i wanna share this with you all my friends and viewers.As its my poem and my feelings so definitely I like it but what about you.Your comments and your likes will be precious for me.
So please if you will like my poem than put your valuable comments with it also.


Here it is....Thanks....


जाने कहाँ से मिल गया,
वो हसीन दर्द का सौदागर,
जो दर्द बेचता घूम रहा, 
कभी नज़र मिला, कभी मुस्का कर, 
थी अजब कशिश उसकी बातों में, 
आँखों में गजब खुमारी थी, 
गालों की लाली मस्ती भरी, 
चेहरे की रंगत प्यारी थी,
अब बढ़ चले हम उसकी ओर,
सौदेबाजी की तैयारी थी, 
था वो दर्द का सौदागर, 
हंसने की हमें बीमारी थी, 
हंसी उसे हम दे आये,
अब दर्द की गठरी हमारी थी,
दर्द किसी का हम लेकर,
चल दिए अपने पथ पर,
और हंसी हमारी ले गया,
वो हसीन दर्द का सौदागर, 
जाने कहाँ से मिल गया, 
वो हसीन दर्द का सौदागर.


- Written By Bharat Singh (By Me)


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