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Madhushala in Rajasthani Language....

Today I am going to post Great Poem Madhushala, By Shri Haribansh Rai Bachchan in Marwadi 
( Rajasthani ) folk or local language of Rajasthan.


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नशे रे भाव सु अंगूरों री बना लायो शराब, 

जिव री जड़ी , म्हारे हाथ सु ही पासू प्यालो ,
पेली भोग लगा लू थारो पछे परसाद जग पासी ,
सगला सु पेली थारी आव भगत करती म्हारी मधुशाला ||१ || 

तिस थने तो , संसार ने तपार निकाल लासु हाला .( शराब )
एक पग सु साकी बनर नाचसू लेर प्यालो ,
जून री मिठास तो थारे ऊपर कदेइ वार दी ही ,
आज सगळी दे देसु मै जाग पनार मधुशाला ||२ || 

जिव री जड़ी , तू म्हारी हाला है मै थारो तीसो प्यालो ,
खुद ने म्हारे मया भर थू बनजावे पीवन वालो ,
मै थने छल छलकावतो , मस्त मने पीर थू होतो , 
एक दूजे खातिर आज एक सार हां मधुशाला ||३ ||

भावुकता अंगूर गुच्छा सु खिंच कल्पना री हाला ,
कवी साकी बनर आयो है भर पणार कविता रो प्यालो ,
कदी नई कण भर खली होवेलो लाख पिए ,दो लाख पिए ,
बाचन वालो है पीवन वालो ,पोथी म्हारी मधुशाला || ४ || 

मीठी भावनाओं री बोत मीठी रोज बनावु हूँ हाला ,
भरु हूँ इए मीठे सु म्हारे अंतस री तिस रो प्यालो ,
उठार कल्पना रे हाथा सु खुद ही पि जाऊं हूँ ,
खुद मै ही हूँ मै साकी , पीवन वालो ,मधुशाला || ५ || 

शराब खानों जावन ने घर सु चाले पीवन वालो ,
'किसे मारग मै जाऊ ? ' गप्तागोल मे है बो भोलो भालो ,
अलग अलग मारग बतावे सब पर मै ओ बताऊ हूँ ,
मारग पकडर थू एक चाले जा , मिल जासी मधुशाला || ६ || 

चालन ही चालन मया किती जून , हाय , गवाय नाखी ! 
दूर है हाल ',पण , केवे हरेक मारग बतावन वालो ,
हिम्मत नि की बधू आगे खानी कालजो नि की फिरू पाछो ,
म्हारे कर्म सु मने मोडर ,म्हासु दूर खड़ी है मधुशाला ||७ ||

मुंडे सु थू लगातार केतो जा मीठी , शराब ,मीठी हाला ,
हाथो सु चेतो करतो जा एक ललित कल्पित प्यालो ,
ध्योन करिए हा मन मे मीठी ,सुखकर , फूटरी साकी रो ,
और बधियो जा , जात्री , ना थने दूर लागसी मधुशाला || ८ || 

शराब पीवन री मनसा ही जद बन जावे हाला ,
होठो री उन्तावल मे ही जद छवि हो जावे प्याला ,
बने ध्यान ही करते -करते जद साकी साकार , भाईले ,
रेवे ना हाला , प्याला ,साकी ,थने मिलसी मधुशाला || ९ || 

सुण, कलकल , छलछल मीठे घड़े सु ढूलती प्यालो माया हाला ,
सुण , रुनझुन रुनझुन चलती बाँट ती मीठी साकीबाला ,
बस आय पोचिया , दूर कोणी कई , चार पोंडा चालनो है,
चहक रिया ,सुण , पीवन वाला ,खुशबूदार है , ले ,मधुशाला || १० || 

जलतरंग बाजे है ,जद पुचकारे प्याले ने प्यालो ,
वीणा जक्जोरिजे ,चाले जद रुनझुन साकीबाला ,
बक झड़प मधु बेचन वाले री आवाज पखावज री करे ,
मीठे पणे सु मीठी खुशबु और बधावे मधुशाला || ११ || 

मेंदी मंडोडे नरम हाथो माथे माणिक मीठे रो प्यालो ,
अंगूरी नशों घाले सोनलिया रंग सु साकीबाला ,
पाग बेगनी , चोगो बिलु डाट डेट पीवन वालो ,
इन्द्रधनुष सु होड़ लगावति आज रंगीली मधुशाला || १२ || 

हाथो मे आवन सु पेली नखरा दिखासी प्यालो ,
होठो माथे आवन सु पेली अदा दिखासी हाला ,
बोतबार मना करसी साकी आवन सु पेली ,
जात्री , ना घबराए , पेली मान करसी मधुशाला || १३ || 

लाल सुरा री धार लपट जीसी के ना दिया इने ज्वाला ,
फेनिल शराब है ना केदिया इने उर का छाला,
पीड नशों है इए शराब री पुरानी यादा साकी है ,
पीड मे आनंद जिकेरे , आवे बो म्हारी मधुशाला || १४ || 

बलती री ठंडी हाला जीसी जात्री , कोणी म्हारी हाला ,
बलती रे ठन्डे प्याले जिसा जात्री , कोणी म्हारो प्यालो ,
बलती सुरा जगते प्याले माया ,धडकते कालजे री कविता है ,
बलन सु भी भय भीत जीको नई होवे , आवे बो म्हारी मधुशाला || १५ ||

भेवती हाला देखि , देखो लपटा उठाती हमें हाला ,
देखो प्यालो अबे छुव्ते ही होठ बालन वालो ,
'होठ नई ' सगलो सरीर सरीर ,पण पीवन ने दों टोपा मिले '
इसा मधु रे दीवाना ने आज बुलावति मधुशाला || १६ || 

धर्मग्रन्थ सगला बाल नाखीया है , जीके रे अंतस री ज्वाला ,
मिन्दर , मस्जिद ,गिरजे सब ने तोड़ चुक्यो बो मतवालों ,
पंडित , मोमिन , पादरियों रे फंदों ने जीको काट चुक्यो ,
कर सके है आज बीरो आव भगत म्हारी मधुशाला || १७ || 

उन्तावाले होठो सु जीके ,हाय , नई चूमी हाला ,
जोश -बिना काँपे जीके , हां नई छुयो मधु रो प्यालो ,
हाथ पकड़ शर्माव्ती साकी ने खने जीके नहीं खिंच्यो ,
धिन्गाने ही सुखादि जून री बीए मीठी मधुशाला || १८ || 

बणे पुजारी प्रेमी साकी , गंगा जळ पावन हाला ,
रवे फेरतो एकसार गति सु मधु रे प्यालो री माला ,
" और लिए राख, और पिए राख , इए ही मन्त्र रो जाप करे '
मै शिव री मूर्ति बन बेठु , मंदिर होवे आ मधुशाला || १९ ||

भाजी ना मंदिर माया घंटी , चढ़ी कोणी मूर्ति माथे माला ,
बेठो आप रे भवन मौजिन देर मस्जिद रे ताला,
लुटिया खजाना नरपतियो रा ढही गढ़ों री भीत्या ,

रेवे मुबारक पीवन वाला , खुली रेवे आ मधुशाला || २० || 
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