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Very beautiful hindi poem.....



ये चन्द पंक्तियाँ जिसने भी लिखी है खूब लिखी है...



" ग़लतियों से जुदा, तू भी नही, मैं भी नही,
दोनो इंसान हैं, खुदा तू भी नही, मैं भी नही " ... !

" तू मुझे ओर मैं तुझे इल्ज़ाम देते हैं मगर,
अपने अंदर झाँकता, तू भी नही, मैं भी नही " ... !!

" ग़लत फ़हमियों ने कर दी दोनो मैं पैदा दूरियाँ,
वरना फितरत का बुरा, तू भी नही, मैं भी नही "...!!