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Rashmirathi Part - 1.1 - By Ramdhari Singh Dinkar

After a gap of few months i am back with one of the great poem named Rashmirathi by Ramdhari Singh "Dinkar" Ji.

Rashmirathi is quite a phenomenon in the world of Hindi poetry. Today we will talk about what is Rashmirathi is all about and post the first part of it....

कथावस्तु 


रश्मिरथी का अर्थ होता है वह व्यक्ति, जिसका रथ रश्मि अर्थात पुण्य का हो । इस काव्य में रश्मिरथी नाम कर्ण का है क्योंकि उसका चरित्र अत्यन्त पुण्यमय और प्रोज्जवल है।
कर्ण महाभारत महाकाव्य का अत्यन्त यशस्वी पात्र है। उसका जन्म पाण्डवों की माता कुन्ती के गर्भ से उस समय हुआ जब कुन्ती अविवाहिता थीं, अतएव, कुन्ती ने लोकलज्जा से बचने के लिए, अपने नवजात शिशु को एक मंजूषा में बन्द करके नदी में बहा दिया। वह मंजूषा अधिरथ नाम के सुत को मिली। अधिरथ के कोई सन्तान नहीं थी। इसलिए, उन्होंने इस बच्चे को अपना पुत्र मान लिया। उनकी धर्मपत्नी का नाम राधा था। राधा से पालित होने के कारण ही कर्ण का एक नाम राधेय भी है।

रश्मिरथी - Part-1

'जय हो' जग में जले जहाँ भी, नमन पुनीत अनल को,
जिस नर में भी बसे, हमारा नमन तेज को, बल को।
किसी वृन्त पर खिले विपिन में, पर, नमस्य है फूल,
सुधी खोजते नहीं, गुणों का आदि, शक्ति का मूल।
ऊँच-नीच का भेद न माने, वही श्रेष्ठ ज्ञानी है,
दया-धर्म जिसमें हो, सबसे वही पूज्य प्राणी है।
क्षत्रिय वही, भरी हो जिसमें निर्भयता की आग,
सबसे श्रेष्ठ वही ब्राह्मण है, हो जिसमें तप-त्याग।
तेजस्वी सम्मान खोजते नहीं गोत्र बतला के,
पाते हैं जग में प्रशस्ति अपना करतब दिखला के।
हीन मूल की ओर देख जग गलत कहे या ठीक,
वीर खींच कर ही रहते हैं इतिहासों में लीक।
जिसके पिता सूर्य थे, माता कुन्ती सती कुमारी,
उसका पलना हुआ धार पर बहती हुई पिटारी।
सूत-वंश में पला, चखा भी नहीं जननि का क्षीर,
निकला कर्ण सभी युवकों में तब भी अद्‌भुत वीर।
तन से समरशूर, मन से भावुक, स्वभाव से दानी,
जाति-गोत्र का नहीं, शील का, पौरुष का अभिमानी।
ज्ञान-ध्यान, शस्त्रास्त्र, शास्त्र का कर सम्यक् अभ्यास,
अपने गुण का किया कर्ण ने आप स्वयं सुविकास।

Bye for now and will be back with the next part of this great poem......


Ab To Path Yahi Hai - Kavi Dushyant Kumar


ज़िन्दगी ने कर लिया स्वीकार,
अब तो पथ यही है l

अब उभरते ज्वार का आवेग मंध्दिम हो चला है,
एक हल्का सा धुंधलका था कही, कम हो चला है,
यह शिला पिघले न पिघले, रास्ता नम हो चला है,
क्यों करूं आकाश की मनुहार,
अब तो पथ यही है l

क्या भरोसा, कांच का घट है, किसी दिन फूट जाए,
एक मामूली कहानी है, अधूरी छूट जाए,
एक समझौता हुआ था रोशनी से, टूट जाए,
आज हर नक्षत्र है अनुदार,
अब तो पथ यही है l

यह लड़ाई, जो कि अपने आप से मैंने लड़ी है,
यह घुटन, यह यातना, केवल किताबों में पढ़ी है, 
यह पहाड़ी पाँव क्या चढ़ते, इरादों से चढ़ी है,
कल दरीचे ही बनेंगे द्वार, 
अब तो पथ यही है l 


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Gorbandh - Rajasthani Folk song by Bundu Khan Langa

Its another beautiful song from the heart of Rajasthani culture...."Gorbandh"


'Gorbandh' is an ornamental peice made by beads and shells for camel's decorations. Bundu khan, one of the best singer belongs to traditional folk singing group of Sarangiya Langa, who lived in western part of Rajasthan. 


As I born and grown up here in Rajasthan, so I have a special attraction towords its cultural and traditional way of life and thats why I am sharing most of my favorites from this very beautiful part of India called "Rajasthan"...


And I am really thankful to you my friends who giving my blog more than 500 visit a day daily....keep visiting and keep sharing your Love for the traditions and culture of Rajasthan and India...



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Rajasthani Folk Song - Daru Dakha Ro.....



Here it is, One of the Most Beautiful song on "Sharab" ( Liquor ).


The beauty of this song is that the wife is telling to the Kalali ( Bar-Tender ) to serve the Liquor made with Grapes to her husband and telling her that her husband has a golden heart, so precious for her.


So enjoy the song and let me know that you like it or not....



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Nimbuda Nimbuda Nimbuda - Rajasthani Traditional Folk

Again I am here with another beautiful folk song from the very beautiful Rajasthan.


Nimbuda Nimbuda is a traditional rajasthani folk song sang by "Kohinoor of India" Bundu Khan Langa. In this song you will enjoy the beautiful voice of Bundu Khan Langa and also the amazing Beats of Khartaal, an music instrument made with two stones or wood parts.



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Loni Andaata Manuhaar Ro Pyalo - Traditional Rajasthani Folk Song

Loni Andaata Manuhaar Ro Pyalo is a Traditional Rajasthani Folk Song related with Drinks. This song is sang by the traditional folk singers when a group of their Masters who invited them for the party, sit to drink and the rule is that Nobody can Leave the group before everybody completed and the other rule is that you have to drink your drink every time when its get offered to the group, you can't deny.


So after this small details which I have about this song, i think you love to listen this song.




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Madhushala in Rajasthani Language....

Today I am going to post Great Poem Madhushala, By Shri Haribansh Rai Bachchan in Marwadi 
( Rajasthani ) folk or local language of Rajasthan.


Here it is...please Comment or Like or Tweet if you like it....


नशे रे भाव सु अंगूरों री बना लायो शराब, 

जिव री जड़ी , म्हारे हाथ सु ही पासू प्यालो ,
पेली भोग लगा लू थारो पछे परसाद जग पासी ,
सगला सु पेली थारी आव भगत करती म्हारी मधुशाला ||१ || 

तिस थने तो , संसार ने तपार निकाल लासु हाला .( शराब )
एक पग सु साकी बनर नाचसू लेर प्यालो ,
जून री मिठास तो थारे ऊपर कदेइ वार दी ही ,
आज सगळी दे देसु मै जाग पनार मधुशाला ||२ || 

जिव री जड़ी , तू म्हारी हाला है मै थारो तीसो प्यालो ,
खुद ने म्हारे मया भर थू बनजावे पीवन वालो ,
मै थने छल छलकावतो , मस्त मने पीर थू होतो , 
एक दूजे खातिर आज एक सार हां मधुशाला ||३ ||

भावुकता अंगूर गुच्छा सु खिंच कल्पना री हाला ,
कवी साकी बनर आयो है भर पणार कविता रो प्यालो ,
कदी नई कण भर खली होवेलो लाख पिए ,दो लाख पिए ,
बाचन वालो है पीवन वालो ,पोथी म्हारी मधुशाला || ४ || 

मीठी भावनाओं री बोत मीठी रोज बनावु हूँ हाला ,
भरु हूँ इए मीठे सु म्हारे अंतस री तिस रो प्यालो ,
उठार कल्पना रे हाथा सु खुद ही पि जाऊं हूँ ,
खुद मै ही हूँ मै साकी , पीवन वालो ,मधुशाला || ५ || 

शराब खानों जावन ने घर सु चाले पीवन वालो ,
'किसे मारग मै जाऊ ? ' गप्तागोल मे है बो भोलो भालो ,
अलग अलग मारग बतावे सब पर मै ओ बताऊ हूँ ,
मारग पकडर थू एक चाले जा , मिल जासी मधुशाला || ६ || 

चालन ही चालन मया किती जून , हाय , गवाय नाखी ! 
दूर है हाल ',पण , केवे हरेक मारग बतावन वालो ,
हिम्मत नि की बधू आगे खानी कालजो नि की फिरू पाछो ,
म्हारे कर्म सु मने मोडर ,म्हासु दूर खड़ी है मधुशाला ||७ ||

मुंडे सु थू लगातार केतो जा मीठी , शराब ,मीठी हाला ,
हाथो सु चेतो करतो जा एक ललित कल्पित प्यालो ,
ध्योन करिए हा मन मे मीठी ,सुखकर , फूटरी साकी रो ,
और बधियो जा , जात्री , ना थने दूर लागसी मधुशाला || ८ || 

शराब पीवन री मनसा ही जद बन जावे हाला ,
होठो री उन्तावल मे ही जद छवि हो जावे प्याला ,
बने ध्यान ही करते -करते जद साकी साकार , भाईले ,
रेवे ना हाला , प्याला ,साकी ,थने मिलसी मधुशाला || ९ || 

सुण, कलकल , छलछल मीठे घड़े सु ढूलती प्यालो माया हाला ,
सुण , रुनझुन रुनझुन चलती बाँट ती मीठी साकीबाला ,
बस आय पोचिया , दूर कोणी कई , चार पोंडा चालनो है,
चहक रिया ,सुण , पीवन वाला ,खुशबूदार है , ले ,मधुशाला || १० || 

जलतरंग बाजे है ,जद पुचकारे प्याले ने प्यालो ,
वीणा जक्जोरिजे ,चाले जद रुनझुन साकीबाला ,
बक झड़प मधु बेचन वाले री आवाज पखावज री करे ,
मीठे पणे सु मीठी खुशबु और बधावे मधुशाला || ११ || 

मेंदी मंडोडे नरम हाथो माथे माणिक मीठे रो प्यालो ,
अंगूरी नशों घाले सोनलिया रंग सु साकीबाला ,
पाग बेगनी , चोगो बिलु डाट डेट पीवन वालो ,
इन्द्रधनुष सु होड़ लगावति आज रंगीली मधुशाला || १२ || 

हाथो मे आवन सु पेली नखरा दिखासी प्यालो ,
होठो माथे आवन सु पेली अदा दिखासी हाला ,
बोतबार मना करसी साकी आवन सु पेली ,
जात्री , ना घबराए , पेली मान करसी मधुशाला || १३ || 

लाल सुरा री धार लपट जीसी के ना दिया इने ज्वाला ,
फेनिल शराब है ना केदिया इने उर का छाला,
पीड नशों है इए शराब री पुरानी यादा साकी है ,
पीड मे आनंद जिकेरे , आवे बो म्हारी मधुशाला || १४ || 

बलती री ठंडी हाला जीसी जात्री , कोणी म्हारी हाला ,
बलती रे ठन्डे प्याले जिसा जात्री , कोणी म्हारो प्यालो ,
बलती सुरा जगते प्याले माया ,धडकते कालजे री कविता है ,
बलन सु भी भय भीत जीको नई होवे , आवे बो म्हारी मधुशाला || १५ ||

भेवती हाला देखि , देखो लपटा उठाती हमें हाला ,
देखो प्यालो अबे छुव्ते ही होठ बालन वालो ,
'होठ नई ' सगलो सरीर सरीर ,पण पीवन ने दों टोपा मिले '
इसा मधु रे दीवाना ने आज बुलावति मधुशाला || १६ || 

धर्मग्रन्थ सगला बाल नाखीया है , जीके रे अंतस री ज्वाला ,
मिन्दर , मस्जिद ,गिरजे सब ने तोड़ चुक्यो बो मतवालों ,
पंडित , मोमिन , पादरियों रे फंदों ने जीको काट चुक्यो ,
कर सके है आज बीरो आव भगत म्हारी मधुशाला || १७ || 

उन्तावाले होठो सु जीके ,हाय , नई चूमी हाला ,
जोश -बिना काँपे जीके , हां नई छुयो मधु रो प्यालो ,
हाथ पकड़ शर्माव्ती साकी ने खने जीके नहीं खिंच्यो ,
धिन्गाने ही सुखादि जून री बीए मीठी मधुशाला || १८ || 

बणे पुजारी प्रेमी साकी , गंगा जळ पावन हाला ,
रवे फेरतो एकसार गति सु मधु रे प्यालो री माला ,
" और लिए राख, और पिए राख , इए ही मन्त्र रो जाप करे '
मै शिव री मूर्ति बन बेठु , मंदिर होवे आ मधुशाला || १९ ||

भाजी ना मंदिर माया घंटी , चढ़ी कोणी मूर्ति माथे माला ,
बेठो आप रे भवन मौजिन देर मस्जिद रे ताला,
लुटिया खजाना नरपतियो रा ढही गढ़ों री भीत्या ,

रेवे मुबारक पीवन वाला , खुली रेवे आ मधुशाला || २० || 
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Kavi Dushyant Kumar - Kahan To Tay Tha Charaagaan....



कहाँ तो तय था चरागाँ हर एक घर के लिए,
कहाँ चराग मय्यसर नहीं शहर के लिये, 

यहाँ दरख्तों के साये में धूप लगती है,
चलो यहाँ से चले और उम्र भर के लिये,

ना हो कमीज़ तो घुटनों से पेट ढक लेंगे,
ये लोग कितने मुनासिब है इस सफ़र के लिये, 

खुदा नहीं, ना सही, आदमी का ख्वाब सही,
कोई हसीन नज़ारा तो है नज़र के लिये,

वो मुतमइन है कि पत्थर पिघल नहीं सकता,
मैं बेक़रार हूँ आवाज के असर के लिये,

जिये तो अपने बगीचे में गुलमोहर के तले,
मरे तो गैर की गलियों में गुलमोहर के लिये....

Beautiful Love Song - Ke Tera Zikr Hai, Ya Itr Hai (Guzaarish)


Ke Tera Zikr Hai, Ya Itr Hai

Jab Jab Karta Hoon
Mehekta Hoon
Behekta Hoon
Chehekta Hoon
Oo0 Ke Tera, Tera, Tera Zikr Hai
Ya, Itr Hai
Jab Jab Karta Hoon
Mehekta Hoon
Behekta Hoon
Chehakta Hoon

Sholon Ki Tarah
Khusbuyo Mein Dehekta Hoon
Behekta Hoon
Mehekta Hoon

Ke Tera Zikr Hai, Ya Itr Hai
Jab Jab Karta Hoon
Mehekta Hoon
Behekta Hoon
Chehakta Hoon

Tera Zikr Hai, Ya Itr Hai
Jab Jab Karta Hoon
Mehekta Hoon
Behekta Hoon
Chehakta Hoon

Teri Fikr Hai, Ya Fakr Hai
Teri Fikr Hai, Ya Fakr Hai
Jab Jab Karta Hoon
Machalta Hoon
Uchalta Hoon
Fisalta Hoon
Paagal Ki Tarah
Mastiyon Mein
Tehelta Hoon
Uchalta Hoon
Fisalta Hoon
Ke Tera Zikr Hai, Haan Zikr Hai
Ya Itr Hai, Itr Hai

Jab Jab Karta Hoon
Mehekta Hoon
Behekta Hoon
Chehekta Hoon......


Agneepath, Agneepath, Agneepath - By.Dr.Haribansh Rai Bachchan



What a Great poem is this....marvelous...



वृक्ष हों भले खड़े,
हों घने, हों बड़े,
एक पत्र छाँह भी
मांग मत! मांग मत! मांग मत!
अग्निपथ! अग्निपथ! अग्निपथ!
तू न थकेगा कभी,
तू न थमेगा कभी,
तू न मुड़ेगा कभी,
कर शपथ! कर शपथ! कर शपथ!
अग्निपथ! अग्निपथ! अग्निपथ!
यह महान दृश्य है,
चल रहा मनुष्य है,
अश्रु, स्वेद, रक्त से
लथ-पथ, लथ-पथ, लथ-पथ,
अग्निपथ! अग्निपथ! अग्निपथ!
English Translation
Even if there are mighty trees all around you,

Let them be shady, let them be huge,

But, even for the shade of a single leaf,
Beg not, beg never, ask never!
The path of fire you shall tread! 
The path of fire! Yes, That Path of Fire!

You shall never tire,

You shall never slow down,

You shall never turn back,
This oath you will take today!
This oath you will fulfill in your life!
Take this oath!
And walk the Path of Fire, every single day!
The oath of fire! Yes, That Path of Fire!

What greater spectacle,

Than to see such a man walk,

Who in tears, sweat and blood,
Is soaked, covered and coated;
And still walks on in the Path of fire!
Walks the path of fire! Yes, That Path of Fire!


Nar Ho Na Niraash Karo Mann Ko - By Mathili Sharan Gupt ji


कुछ काम करो कुछ काम करो 
जग में रह के निज नाम करो।


यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो!
समझो जिसमें यह व्यर्थ न हो।
कुछ तो उपयुक्त करो तन को
नर हो न निराश करो मन को।

सँभलो कि सुयोग न जाए चला

कब व्यर्थ हुआ सदुपाय भला!
समझो जग को न निरा सपना
पथ आप प्रशस्त करो अपना।
अखिलेश्वर है अवलम्बन को
नर हो न निराश करो मन को।।

जब प्राप्त तुम्हें सब तत्त्व यहाँ

फिर जा सकता वह सत्त्व कहाँ!
तुम स्वत्त्व सुधा रस पान करो
उठ के अमरत्व विधान करो।
दवरूप रहो भव कानन को
नर हो न निराश करो मन को।।

निज गौरव का नित ज्ञान रहे

हम भी कुछ हैं यह ध्यान रहे।
सब जाय अभी पर मान रहे
मरणोत्तर गुंजित गान रहे।
कुछ हो न तजो निज साधन को
नर हो न निराश करो मन को।।

...मैथिली शरण गुप्त...

Mount Abu - Painting of the Nature



Mount Abu  is the highest peak in the Aravalli Range of Rajasthan state in western India. It is located in Sirohi district. Mount Abu is 58 km from Palanpur (Gujarat). The 
mountain forms a distinct rocky plateau 22 km long by 9 km wide. The highest peak on the mountain is Guru Shikhar, at 1,722 metres (5,650 ft) above sea level. It is referred to as 'an oasis in the desert', as its heights are home to rivers, lakes, waterfalls and evergreen forests. The ancient name of Mount Abu is "Arbudaanchal"



History :- 

The Arbuda Mountains (Mount Abu) region is said to be original abode of the famous Gurjaras.The association of the Gurjars with the mountain is noticed in many inscriptions and epigraphs including Tilakamanjari of Dhanpala. These Gurjars (Gujars or Gujjars) migrated from Arbuda mountain region and as early as sixth century A.D, they set up one or more principalities in Rajasthan and Gujarat. Almost all or a larger part of Rajasthan and Gujarat had been known as Gurjaratra (country ruled or protected by the Gurjars) or Gurjarabhumi(land of the Gurjars) for centuries prior to Mughal period.
The conquest of Mount Abu in 1311 by Rao Lumba of Deora-Chauhan dynasty brought to an end the reign of the Parmars and also marked the decline of Mount Abu. He shifted the capital city to Chandravati in the plains. After the destruction of Chandravati in 1405, Rao Shasmal made Sirohi his headquarters.Later it was leased by the British government from the then Maharaja of Sirohi for use as the headquarter of the resident to Rajputana (another name for Rajasthan).


Mythology :-

In the Puranas, the region has been referred to as Arbudaranya, ("forest of Arbhuda") and 'Abu' is a dimunitive of this ancient name. It is believed that sage Vasishtha retired to the southern spur at Mount Abu following his differences with sage Vishvamitra. There is another mythology according to which a serpant named "Arbuda" who saved the life of Nandi - Lord Shiva's bull. The incident happened on the mountain which is currently known as mount Abu and so the mountain is named "Arbudaranya" after this incident which gradually became Abu.

Tourists Attractions :-

The town of Mount Abu, the only hill station in Rajasthan, is located at an elevation of 1,220 m (4,003 ft). It has been a popular retreat from the heat of Rajasthan and neighbouring Gujarat for centuries. The Mount Abu Wildlife Sanctuary was established in 1960 and covers 290 km² of the mountain.


The mountain is also home to several Hindu temples, including the Adhar Devi Temple, carved out of solid rock; the Shri Raghunathji Temple; and a shrine and temple to Dattatreya built atop the Guru Shikhar peak and a number of Jain temples including Dilwara, a complex of temples carved of white marble that was built between the 11th and 13th centuries AD. The oldest of these is the Vimal Vasahi temple, built in 1021 AD by Vimal Shah and dedicated to the first of the Jain Tirthankaras and they include the Achaleswar Mahadev Temple (1412) and the Kantinath Temple (1513). It is also the location of "Madhuban", the headquarters of the Brahma Kumaris World Spiritual University.










The Achalgarh fort, built in the 14th century by Rana Kumbha of Mewar is nearby and at its center is the popular visitor attraction of the Nakki Lake. There is the Toad Rock on a hill near the lake.
The Durga temple, Ambika Mata Temple lies in a cleft of rock in Jagat, just outside of Mount Abu.

Climate :- 

Summer Summer season prevails from mid of April to mid of June when average Maximum temperature remains around 36 °C. Therefore it will be better if you bring light cotton clothes. These clothes are fit for the summers of Mount Abu.
Monsoon Due to its relief and geographical conditions, it rains well in Mount Abu during the monsoons. During the rainy season even the temperature falls down. Normal summer clothing will do. It is wiser to carry an umbrella in order to avoid being caught at the wrong side of monsoon.
Winter Winters are cool in Mount Abu, with mercury hovering around 16 °C to 22 °C. Nights are really chilly and average night temperature is around 4 to 12 °C. Nevertheless, there are instances when the temperature has dipped to as low as −2 to −3 °C. Heavy winter clothing is preferable. You can include long coats and outsiders in your luggage. In daytime, light pullovers are sufficient.



Transportation :-

The nearest railway station is at Abu Road, in the lowlands 27 km southeast of Mount Abu town. The station is on the main Indian Railways line between Delhi,Palanpur and Ahmedabad.Its is very well connected with daily travels bus service from Ahmedabad and other big cities of Gujarat. It has regular trains for Jaipur, Jodhpur, Udaipur, Ajmer, Indore, Agra, Bhopal, Gwalior, Jabalpur, Ujjain, Delhi, Mumbai, Calcutta, Chennai, Hyderabad, Bangalore, Ahmedabad, Pune and weekly trains from Trivandrum(Kochu Veli).



Pagli Ladki - By Dr.Kumar Vishwas

Amawas ki kaali raaton mein dil ka darwaja khulta hai, Jab dard ki pyaali raaton mein gum ansoon ke sang hote hain,


Jab pichwade ke kamre mein hum nipat akele hote hain, Jab ghadiyan tik-tik chalti hain, sab sote hain, hum rote hain,


Jab baar baar dohrane se saari yaadein chuk jaati hain, Jab unch-neech samjhane mein mathe ki nas dukh jaati hain,


Tab ek pagli ladki ke bin jeena gaddari lagta hai, Aur us pagli ladki ke bin marna bhi bhari lagta hai,


Jab pothe khali hote hain, jab har sawali hote hain, Jab gazlen raas nahin aatin, afsane gaali hote hain,


Jab baasi feeki dhoop sametein din jaldi dhal jaata hai, Jab suraj ka laskhar chhat se galiyon mein der se jaata hai,


Jab jaldi ghar jaane ki ichha mann hi mann ghut jaati hai, Jab college se ghar laane waali pahli bus chhut jaati hai,


Jab beman se khaana khaane par maa gussa ho jaati hai, Jab lakh mana karne par bhi paaro padhne aa jaati hai,


Jab apna manchaha har kaam koi lachari lagta hai, Tab ek pagli ladki ke bin jeena gaddari lagta hai,


Aur us pagli ladki ke bin marna bhi bhari lagta hai, Jab kamre mein sannate ki awaj sunai deti hai,


Jab darpan mein aankhon ke neeche jhai dikhai deti hai, Jab badki bhabhi kahti hain, kuchh sehat ka bhi dhyan karo,


Kya likhte ho lalla dinbhar, kuchh sapnon ka bhi samman karo, Jab baba waali baithak mein kuchh rishte waale aate hain,


Jab baba humein bulate hain, hum jaate hain, ghabrate hain, Jab saari pahne ek ladki ka ek photo laya jaata hai,


Jab bhabhi humein manati hain, photo dikhlaya jaata hai, Jab saare ghar ka samjhana humko fankari lagta hai,


Tab ek pagli ladki ke bin jeena gaddari lagta hai, Aur us pagli ladki ke bin marna bhi bhari lagta hai,


Didi kahti hain us pagli ladki ki kuchh aukat nahin, Uske dil mein bhaiya tere jaise pyare jasbat nahin,


Woh pagli ladki mere liye nau din bhooki rahti hai, Chup-chup saare vrat karti hai, par mujhse kabhi na kahti hai,


Jo pagli ladki kahti hai, main pyar tumhi se karti hoon, Lekin mein hoon majboor bahut, amma-baba se darti hoon


Us pagli ladki par apna kuchh adhikar nahin baba, Yeh katha-kahani kisse hain, kuchh bhi to saar nahin baba,


Bas us pagli ladki ke sang jeena fulwari lagta hai, Aur us pagli ladki ke bhin marna bhi bhari lagta hai... 


.............Dr. Kumar Vishwas...............