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Kripa Ram Khiriya - Rajia Ra Doha ( Part - 5 )

Hi everyone....first of all thanks a lot you all the people for keep reading and keep responding to my blog.

Sorry for delayed post, As I was busy in my studies and office.

As for a change i posted a different post last time, but in this post i will continue to write the famous "Rajia Ra Doha".So lets start......



13. सरै न कोय, बळ प्राकम हिम्मत बिना |हलकाऱ्या की होय, रंगा स्याळां कारज राजिया ||
  
बल पराकर्म एवं हिम्मत के बिना कोई भी कार्य सफल नही होता | हे राजिया रंगे सियारों की तरह ललकारने से भी क्या होता है |

Any act or work would not be successful without strength and courage.So Hey Rajia, Just shouting like The Red Wolf is not enough.


14. मिले सिंह वन मांह, किण मिरगा मृगपत कियो |
जोरावर अति जांह, रहै उरध गत राजिया ||

सिंह को वन मे किन मृगो ने मृगपति घोषित किया था | जो शक्तिशाली होता है उसकी उर्ध्वगति स्वत: हो जाती है |

Not a deer can declare a Lion The King of Forest, he is the because of its own power and strength.So hey Rajia, Powerful rise automatically.


15. खळ धूंकळ कर खाय, हाथळ बळ मोताहळां |
जो नाहर मर जाय , रज त्रण भकै न राजिया ||

सिंह युद्ध में अपने पंजों से शत्रु हाथियों के मुक्ताफल-युक्त मस्तक विदीर्ण कर ही उन्हें खाता है | वह चाहे भूख से मर जाय,किंतु घास कभी नही खायेगा |
The Lion can die but never eats grass.Hey Rajia, he just like to fight like a warrior in the battle and like to kill and eat his enemies.

16. नभचर विहंग निरास, विन हिम्मत लाखां वहै |
बाज त्रपत कर वास , रजपूती सूं राजिया ||

आकाश में लाखों पक्षी हिम्मत के बिना (भूख के मारे) उड़ते रहते है,किंतु हे राजिया ! बाज अपने पराक्रम से ही पक्षियों का शिकार कर तृप्त जीवन जीता है |
A warrior lives his life with proud, but a common man always trying and trying to get success ful.Hey Rajia, just like an Eagle lives his life by destroying his enemies, but millions of other birds just fly and fly to get feed.

Thank you...stay happy, stay healthy.


Saving Rachel (A Donovan Creed Crime Novel)                        When You Went Away



Kripa Ram Khiriya - Rajia Ra Doha ( Part - 4 )

Hi friends......
Sorry for late post.Here is the next part of Rajia Ra Doha (couplets of Rajia).


9 केई नर बेकार,बड करतां कहताँ बळै |
राखै नही लगार,रांम तणौ डर राजिया ||

कई लोग किसी की कीर्ति करने अथवा कहने से व्यर्थ ही जलने लगते है | ऐसे ईर्ष्यालु व्यक्ति तो परमात्मा का भी किंचित भय नही रखते |
Many people just feel jealous by seeing someone's fame.Hey Rajia! These people even don't afraid of God.
10 चुगली ही सूं चून, और न गुण इण वास्तै |
खोस लिया बेखून,रीगल उठावे राजिया ||

जिन लोगो के पास चुगली करने के अलावा जीविकोपार्जन का अन्य कोई गुण नही होता,ऐसे लोग ठिठोलियाँ करते-करते ही निरपराध लोगो की रोजी रोटी छीन लेते है |
People who have no other work, just spend their time in gossiping.Hey Rajia! These people take away the Bread and Butter of innocent people. 
11 आछो मांन अभाव मतहीणा केई मिनख |
पुटियाँ कै ज्यूँ पाव , राखै ऊँचो राजिया ||

कई बुद्धिमान व्यक्तियों को सम्मान मिलने पर वे पचा नही पाते और उस अ-समाविष्ट स्थिति मे अभिमान के कारण पुटियापक्षी की तरह सदैव अपने पैर ऊपर (आकाश) की और किए रहते है
Many intelligent people after getting the respect can't able to digest it.Hey Rajia! Such kind of people never respect anyone else because of their own pride and igo.
12 गुण अवगुण जिण गांव, सुणै न कोई सांभळै |
उण नगरी विच नांव , रोही आछी राजिया ||

जहाँ गुण अवगुण का न तो भेद हो और न कोई सुनने वाला हो , ऐसी नगरी से तो,हे राजिया ! निर्जन वन ही अच्छा है |
A city where no one knows the difference between Attribute and Misconduct.Hey Rajia! An Uninhabited forest is much better than that city.

Love at First Flight
Alone                                                                             


Kripa Ram Khiriya - Rajia Ra Doha ( Part - 3 )

Here are the some other couplets on ethics written by Kavi Kripa Ram Ji.Hope you enjoyed the my previous post.

Enjoy this one also....


5 मुख ऊपर मिथियास, घट माहि खोटा घडे |
इसडा सूं इकलास, राखिजे नह राजिया ||

जो मनुष्य मुंह पर तो मीठी-मीठी बाते करते है,किंतु मन ही मन हानि पहुँचाने वाली योजनायें रचते है,ऐसे लोगो से, हे राजिया ! कभी मित्रता नही रखनी चाहिए |
The person who become your lover in front of you, but in his heart he have bad feeling for you (To harm you), So hey Rajia never be friend of this kind of people.
6 अहळा जाय उपाय,आछोडी करणी अहर |
दुष्ट किणी ही दाय, राजी हुवै न राजिया ||

दुष्ट व्यक्ति के साथ कितना ही अच्छा व्यवहार और उपकार क्यों न किया जाए,वह निष्फल ही होगा,क्यों कि हे राजिया ! ऐसे लोग किसी भी तरह प्रसन्न नही होते |
Hey Rajia an evil man can't be happy, whatever favor or work of goodness you did for him.
7 गुण सूं तजै न गांस,नीच हुवै डर सूं नरम |
मेळ लहै खर मांस, राख़ पडे जद राजिया ||

नीच मनुष्य भलाई करने से कभी दुष्टता नही छोड़ता,वह तो भय दिखाने से ही नम्र होता है, जिस प्रकार,हे राजिया ! गधे का मांस राख़ डालने से ही सीझता (पकता ) है |
An evil never leave his evilness for your goodness to him, only fear makes him gentle, Hey Rajia just like Donkey's meat can't cooked without putting ash on it.
8 दुष्ट सहज समुदाय,गुण छोडे अवगुण गहै |
जोख चढी कुच जाय, रातौ पीवै राजिया ||

दुष्टों का समुदाय गुण छोड़ कर अवगुण ग्रहण करता है, क्योंकि यह उनका सहज स्वभाव है,जिस प्रकार,हे राजिया ! जोंक स्तन पर चढ़ कर भी दूध की जगह रक्त ही पीती है |
Wicked community takes the holes so easily by leaving the good things, because its their innate nature, hey Rajia just like, leech like to drink blood instead of milk even climbed up on breast.

The King Is DeadSummer at Willow Lake        

Kripa Ram Khiriya - Rajia Ra Doha ( Part - 2 )

Here is the next part of Rajia Ra doha (Couplets of Rajia).Here are some couplets on ethics by Kavi Kripa Ram ji, addressing his servent Rajia.You can find here the hindi and english translation of the couplets (dohe).I tried my best to translet them correctly, if still you find any mistake then please let me know.(in comments or on my email)...thanks...

Lets start.......

1 कुट्ळ निपट नाकार, नीच कपट छोङे नहीं |
उत्तम करै उपकार,रुठा तुठा राजिया ||

कुटिल और नीच व्यक्ति अपनी कुटिलता और नीचता कभी नही छोड़ सकते, जबकि हे राजिया ! उत्तम कोटि के व्यक्ति चाहे रुष्ट हो या तुष्ट, वे हमेशा दूसरो का भला ही करेंगे |
Crooked and vile man never leave his cynicism and meanness, but hey Rajia! A gentleman whether he is angry or pleased, he will always do good to others |

2 सुख मे प्रीत सवाय, दुख मे मुख टाळौ दियै |
जो की कहसी जाय, रांम कचेडी राजिया ||

जो लोग सुख में तो खूब प्रीत दिखाते है किंतु दुःख पड़ने पर मुंह छिपा लेते है, हे राजिया ! वे ईश्वर की अदालत में जाकर क्या जबाब देंगे |
A person who show a lot of love to you in your good time, but try to hide themselves in your bad time, hey Rajia! What will they answer in front of god.
3 समझणहार सुजांण, नर मौसर चुकै नहीं |
औसर रौ अवसांण,रहै घणा दिन राजिया ||

समझदार एव विवेकशील व्यक्ति कभी हाथ लगे उचित अवसर को खोता नही,क्यों कि हे राजिया ! अवसर पर किया गया अहसान बहुत दिनो तक याद रहता है |
A wise and reasonable person never lost any opportunity, because hey Rajia! Life never give so many opportunities.

4 किधोडा उपकार, नर कृत्घण जानै नही |
लासक त्यांरी लार, रजी उडावो राजिया ||

जो लोग कृत्धन होते है, वे अपने पर किए गए दूसरो के उपकार को कभी नही मानते,इसलिए,हे राजिया ! ऐसे निकृष्ट व्यक्तियों के पीछे धुल फेंको |
People who forget your favor or help, hey Rajia! You should forget them or leave them.

Pride and PrejudiceThe Adventures of Sherlock Holmes                                                                                     

Hindustaan - Siyasat Aur Insaan

Ek gudiya ki kai kathaputliyon mein jaan hai
aaj shayar ye tamasha dekh kar hairaan hai

khaas sadaken band hain tab se marammat ke liye
ye humare waqt ki sabse badi pahchaan hai

ek budha aadami hai mulk mein ya youn kaho
is andheri kothari mein ek roshandaan hai

maslahat aameez hote hain siyaasat ke kadam
tu na samajhega siyaasat tu abhi insaan hai

is kadar pabandi-e-mazahab ki sadaken aapki
jab se aazadi mili mulk mein ramzaan hai

kal numaaish mein mila wo cheethardhe pahne hue
maine poocha naam to bola hindustaan hai

mujh mein rahte hain karodon log chup kaise rahoon
har ghazal ab saltanat ke naam ek bayaan hai



 - Kavi Dushyant Kumar

Pithal Aur Pathal - Story of A Warrior and A Father

Pithal aur Pathal a very Inspiring and Motivational Poem by Kanahiya Lal Sethia.This Poem tells us The Story of A Warrior who is a father also..Who lost his kingdom and living in jungle..How his heart melts when his son have no food to eat...This is the story of Maharana Pratap - The Great Indian Warrior

To feel the Flavor of Love between a Father & his child and to know the depth of this relationship please read it....read it and feel it...



अरै घास री रोटी ही, जद बन बिलावड़ो ले भाग्यो।
नान्हो सो अमर्यो चीख पड्यो, राणा रो सोयो दुख जाग्यो।
हूं लड्यो घणो हूं सह्यो घणो, मेवाड़ी मान बचावण नै,
हूं पाछ नहीं राखी रण में, बैर्यां री खात खिडावण में,
जद याद करूँ हळदी घाटी नैणां में रगत उतर आवै,
सुख दुख रो साथी चेतकड़ो सूती सी हूक जगा ज्यावै,
पण आज बिलखतो देखूं हूँ, जद राज कंवर नै रोटी नै,
तो क्षात्र-धरम नै भूलूं हूँ, भूलूं हिंदवाणी चोटी नै

मैं’लां में छप्पन भोग जका मनवार बिनां करता कोनी,
सोनै री थाल्यां नीलम रै बाजोट बिनां धरता कोनी,
ऐ हाय जका करता पगल्या, फूलां री कंवळी सेजां पर,
बै आज रुळै भूखा तिसिया, हिंदवाणै सूरज रा टाबर,
आ सोच हुई दो टूक तड़क राणा री भीम बजर छाती,
आंख्यां में आंसू भर बोल्या मैं लिख स्यूं अकबर नै पाती,
पण लिखूं कियां जद देखै है आडावळ ऊंचो हियो लियां,
चितौड़ खड्यो है मगरां में विकराळ भूत सी लियां छियां,


मैं झुकूं कियां ? है आण मनैं कुळ रा केसरिया बानां री,
मैं बुझूं कियां ? हूं सेस लपट आजादी रै परवानां री,
पण फेर अमर री सुण बुसक्यां राणा रो हिवड़ो भर आयो,
मैं मानूं हूँ दिल्लीस तनैं समराट् सनेषो कैवायो।
राणा रो कागद बांच हुयो अकबर रो’ सपनूं सो सांचो,
पण नैण कर्यो बिसवास नहीं जद बांच नै फिर बांच्यो,
कै आज हिंमाळो पिघळ बह्यो, कै आज हुयो सूरज सीतळ,
कै आज सेस रो सिर डोल्यो, आ सोच हुयो समराट् विकळ,


बस दूत इसारो पा भाज्यो पीथळ नै तुरत बुलावण नै,
किरणां रो पीथळ आ पूग्यो ओ सांचो भरम मिटावण नै,
बीं वीर बांकुड़ै पीथळ नै, रजपूती गौरव भारी हो,
बो क्षात्र धरम रो नेमी हो, राणा रो प्रेम पुजारी हो,
बैर्यां रै मन रो कांटो हो बीकाणूँ पूत खरारो हो,
राठौड़ रणां में रातो हो बस सागी तेज दुधारो हो,
आ बात पातस्या जाणै हो, धावां पर लूण लगावण नै,


पीथळ नै तुरत बुलायो हो, राणा री हार बंचावण नै,
म्है बाँध लियो है पीथळ सुण पिंजरै में जंगळी शेर पकड़,
ओ देख हाथ रो कागद है तूं देखां फिरसी कियां अकड़ ?
मर डूब चळू भर पाणी में, बस झूठा गाल बजावै हो,
पण टूट गयो बीं राणा रो, तूं भाट बण्यो बिड़दावै हो,
मैं आज पातस्या धरती रो मेवाड़ी पाग पगां में है,
अब बता मनै किण रजवट रै रजपती खून रगां में है ?
जंद पीथळ कागद ले देखी, राणा री सागी सैनाणी,


नीचै स्यूं धरती खसक गई, आंख्यां में आयो भर पाणी,
पण फेर कही ततकाळ संभळ आ बात सफा ही झूठी है,
राणा री पाघ सदा ऊँची राणा री आण अटूटी है।
ल्यो हुकम हुवै तो लिख पूछूं, राणा नै कागद रै खातर,
लै पूछ भलांई पीथळ तूं, आ बात सही बोल्यो अकबर,


म्हे आज सुणी है नाहरियो, स्याळां रै सागै सोवै लो,
म्हे आज सुणी है सूरजड़ो, बादळ री ओटां खोवैलो;
म्हे आज सुणी है चातगड़ो, धरती रो पाणी पीवै लो,
म्हे आज सुणी है हाथीड़ो, कूकर री जूणां जीवै लो
म्हे आज सुणी है थकां खसम, अब रांड हुवैली रजपूती,
म्हे आज सुणी है म्यानां में, तरवार रवैली अब सूती,
तो म्हांरो हिवड़ो कांपै है मूंछ्यां री मोड़ मरोड़ गई,
पीथळ नै राणा लिख भेज्यो आ बात कठै तक गिणां सही ?


पीथळ रा आखर पढ़तां ही, राणा री आँख्यां लाल हुई,
धिक्कार मनै हूँ कायर हूँ, नाहर री एक दकाल हुई,
हूँ भूख मरूं हूँ प्यास मरूं, मेवाड़ धरा आजाद रवै
हूँ घोर उजाड़ां में भटकूं, पण मन में मां री याद रवै,
हूँ रजपूतण रो जायो हूं रजपूती करज चुकाऊंला,
ओ सीस पड़ै पण पाघ नही दिल्ली रो मान झुकाऊंला,


पीथळ के खिमता बादल री, जो रोकै सूर उगाळी नै,
सिंघां री हाथळ सह लेवै, बा कूख मिली कद स्याळी नै?
धरती रो पाणी पिवै इसी, चातग री चूंच बणी कोनी,
कूकर री जूणां जिवै इसी, हाथी री बात सुणी कोनी,
आं हाथां में तलवार थकां, कुण रांड़ कवै है रजपूती ?
म्यानां रै बदळै बैर्यां री, छात्याँ में रैवैली सूती,
मेवाड़ धधकतो अंगारो आंध्यां में चमचम चमकै लो,
कड़खै री उठती तानां पर पग पग पर खांडो खड़कैलो,
राखो थे मूंछ्याँ ऐंठ्योड़ी, लोही री नदी बहा द्यूंला,
हूँ अथक लडूंला अकबर स्यूँ, उजड्यो मेवाड़ बसा द्यूंला,
जद राणा रो संदेष गयो पीथळ री छाती दूणी ही,
हिंदवाणों सूरज चमकै हो अकबर री दुनियां सूनी ही।